जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी के निमंत्रण पर कनाडा के पीएम: निज्जर विवाद के बावजूद भारत का महत्व
कनाडा कानानास्किस, 8 जून 2025: भारत और कनाडा के बीच हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर चल रहे राजनयिक गतिरोध के बीच, कनाडा के प्रधान मंत्री मार्क कार्नी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को आगामी जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने के अपने फैसले का बचाव किया है। कार्नी ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भूमिका और प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर इसकी केंद्रीय स्थिति के कारण उसकी भागीदारी आवश्यक है।
कनाडा इस साल 15 से 17 जून तक अल्बर्टा के कानानास्किस में जी7 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह निमंत्रण तब आया है जब पिछले साल कनाडा के पूर्व प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों के संभावित संबंध का आरोप लगाया था, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों में भारी गिरावट आई थी।
निमंत्रण का औचित्य
प्रधान मंत्री कार्नी ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, प्रभावी रूप से दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, और कई आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए केंद्रीय है।" उन्होंने आगे कहा कि "कुछ देश" ऐसे हैं जिन्हें महत्वपूर्ण वैश्विक चर्चाओं के लिए "मेज पर होना चाहिए"। उन्होंने बताया कि यह निमंत्रण अन्य जी7 सदस्य देशों के परामर्श के बाद दिया गया है।
कनाडा के प्रधान मंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, कार्नी और मोदी ने शुक्रवार को फोन पर बात की, जिसके दौरान कार्नी ने मोदी को निमंत्रण दिया। मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है और उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि वह शिखर सम्मेलन में कार्नी से मिलने के लिए उत्सुक हैं।
निज्जर विवाद और संबंधों में नरमी
हरदीप सिंह निज्जर, एक प्रमुख सिख अलगाववादी नेता, की जून 2023 में कनाडा के सरे, ब्रिटिश कोलंबिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि भारतीय सरकार के एजेंट इस हत्या में शामिल थे। भारत ने इन आरोपों को "बेतुका और प्रेरित" बताते हुए दृढ़ता से खारिज कर दिया था। इस विवाद के परिणामस्वरूप दोनों देशों ने एक-दूसरे के शीर्ष राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था।
हालांकि, मार्क कार्नी के अप्रैल में कनाडा के प्रधान मंत्री के रूप में चुनाव जीतने के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में संभावित सुधार की उम्मीदें जगी हैं। कार्नी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत और कनाडा ने कानून प्रवर्तन संवाद जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है जो "जवाबदेही के मुद्दों को पहचानता है"। उन्होंने कहा कि चल रही जांच पूरी तरह से स्वतंत्र रहेगी और उनकी सरकार कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
विरोध और आलोचना
निज्जर की हत्या से जुड़े आरोपों के बावजूद मोदी को निमंत्रण देने के कार्नी के फैसले की कनाडा के सिख समुदाय के कुछ सदस्यों और विपक्षी दलों ने निंदा की है। वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन ने इस निमंत्रण को "सिख कनाडाई लोगों के साथ विश्वासघात" बताया है, जबकि सिख फेडरेशन ऑफ कनाडा ने इसे "गंभीर अपमान" कहा है। कनाडाई न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) ने भी इस फैसले को "गहराई से परेशान करने वाला" बताया है।
इन आलोचनाओं के जवाब में, कार्नी ने दोहराया कि कनाडा एक कानून का राज वाला देश है और कानूनी प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने निज्जर की हत्या में मोदी की संलिप्तता के बारे में सीधे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि एक चल रहे कानूनी मामले पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।
जी7 शिखर सम्मेलन का एजेंडा
जी7 शिखर सम्मेलन के एजेंडे में "अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा," "वैश्विक आर्थिक स्थिरता," और "डिजिटल संक्रमण" जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। भारत जी7 का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई शिखर सम्मेलनों में उसे मेजबान देश द्वारा अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है, जो वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
इस बार, भारत के साथ-साथ, कनाडा ने मेक्सिको के राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाउम, यूक्रेन के वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की और ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री एंथोनी अल्बनीस को भी आमंत्रित किया है। आमंत्रितों की पूरी सूची अभी जारी नहीं की गई है।
आगे का रास्ता
यह निमंत्रण भारत और कनाडा के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतीक है। निज्जर विवाद के बावजूद, दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग जारी रखने की इच्छा एक सकारात्मक संकेत है। प्रधान मंत्री मोदी की जी7 शिखर सम्मेलन में उपस्थिति दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से स्थापित करने और साझा हितों पर काम करने का अवसर प्रदान कर सकती है, जबकि निज्जर मामले की जांच जारी रहेगी। यह देखना होगा कि इस शिखर सम्मेलन से दोनों देशों के बीच संबंधों में कितनी नरमी आती है और क्या भविष्य में राजनयिक संबंधों में पूरी तरह से सुधार हो पाता है।
